चाइना उत्पादों का बहिष्कार आज से शुरू, चीन को एक लाख करोड़ का झटका देंगे भारतीय
बीते 20 वर्ष में 3500 फ़ीसदी बढ़ा चीन से आयात

चाइना उत्पादों का बहिष्कार आज से शुरू, चीन को एक लाख करोड़ का देंगे भारतीय
बीते 20 वर्ष में 3500 फ़ीसदी बढ़ा चीन से आयात
दिल्ली, वर्ष 2001 में चीनी वस्तुओं का भारत में आयात केवल 2 बिलियन डॉलर था जो आज वर्तमान समय में बढ़कर 70 बिलियन डॉलर हो गया है मतलब कि यह केवल 20 साल में चीन से आयात में 3500% की वृद्धि हुई है, यह साफ दर्शाता है कि यह एक सोची-समझी रणनीति के तहत चीन भारत के रिटेल बाजार पर कब्जा जमाने की कोशिश में लगा हुआ है जिसको भारत के व्यापारी और नागरिक किसी भी सूरत में सफल नहीं होने देंगे|
विगत वर्ष चीनी उत्पादों के बहिष्कार अभियान का दूसरा चरण भारतीय कारोबारियों की ओर से आज से फिर शुरू किया जा रहा है, इसमें दिसंबर 2021 तक चीन में निर्मित वस्तुओं के भारत में आयात को एक लाख करोड रुपए कम करने का लक्ष्य तय किया गया है, कैट (cait) ने आज देश भर में *भारतीय सामान हमारा-अभियान*(Boycottchinese products) नारे के साथ चीनी वस्तुओं के बहिष्कार का अभियान शुरू कर दिया है|कैट के अनुसार यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकल फॉर वोकल और आत्मनिर्भर भारत के आह्वान को सफल बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा|
कैट के महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा है कि इस चरण में एफएमसीजी उत्पाद एवं रोजमर्रा की वस्तुएं रसोई उपकरण क्रोकरी गिफ्ट आइटम फर्निशिंग फुटवियर किराना खिलौने गिफ्ट आइटम फर्निशिंग फैब्रिक जैसी आम वस्तुएं जो अभी तक चीन से आयात होती हैं इनके पूर्ण बहिष्कार की योजना बना ली गई है, उन्होंने बताया कि चीन से आयात की जाने वाली है वस्तुएं भारत में भी लंबे समय से पैदा की जा रही हैं ऐसे में भारतीय कारोबारियों और खरीदारों से यह अनुरोध किया जाएगा तथा इसके लिए उनको पूर्ण जागरूक किया जाएगा कि चीनी वस्तुओं के बाजार की बजाए भारतीय उत्पाद ही भेजें और खरीदें वहीं दूसरी ओर बीसी भर्तियां ने कहा कि चीन से भारत में मोटे तौर पर चार प्रकार की वस्तुएं आयात होती हैं जिनमें तैयार माल finished goods कच्चा माल अर्थात रो मेटेरियल स्पेयर पार्ट्स एवं तकनीकी उत्पाद शामिल हैं
खंडेलवाल एवं भरतीया ने कहा है कि चीन को पछाड़कर भारतीय लघु उद्योगों को बढ़ाएंगे पिछले 10 साल में भारत के व्यापार और उद्योग उन्हें चीनी वस्तुओं के भारत में बढ़ते दखल को नजरअंदाज कर दिया ,और इन वस्तुओं को कोई विकल्प तैयार करने की कोशिश नहीं की साथ ही सरकारें भी इस मामले में विफल रही और भारत के व्यापार पर कब्जा जमाने के चीन के इरादों को समझ नहीं पाई जिसके चलते देश के विकल्पों को लेकर कोई नीति नहीं बनाई गई ,अब इस मुद्दे को समझा है और सरकार से चीनी के उत्पादों के मजबूत विकल्प के रूप में भारतीय सामानों को पर्याप्त मात्रा में बनाए जाने की मुद्दों को लेकर बात शुरू की जाएगी साथ ही एक रणनीति के तहत भारत के लघु उद्योगों को इस मामले में आवश्यक रूप से समृद्ध करने की पहल की जाएगी, इस अभियान में 8 करोड़ से अधिक व्यापारी जुड़ेंगे शुरुआती दौर में इस अभियान में देश भर से 40 हज़ार से ज्यादा व्यापारी संगठन और उनसे जुड़े 8 करोड़ व्यापारी भाग लेंगे इस अभियान के तहत व्यापारियों एवं ग्राहकों के बीच एक व्यापक जन जागरण अभियान चलाया जाएगा तथा देश के 138 करोड लोगों का पहला संपर्क देश भर में किसी भी व्यापारी की दुकान से होता है ऐसे में व्यापारी भी अपनी दुकान पर आने वाले ग्राहकों को चीनी वस्तुओं के बहिष्कार का संदेश देंगे|