विधान सभा उत्तराखंड में हुई भर्तियों की होगी जांच :सीएम धामी
पूर्व सरकार से वर्तमान सरकार के कार्यकाल के दौरान हुई भर्तियों की जांच कराने के मूड में सरकार

देहरादून: उत्तराखंड में विधानसभा में हुई भर्तियों की बंदरबांट को लेकर कच्चा चिट्ठा खुल रहा है बीते वर्ष 2021 में उत्तराखंड विधानसभा में हुई भर्तियों में कुछ ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जिसको सुनकर हर कोई हैरान रह जाएगा सीएम और मंत्रियों के रिश्तेदारों को नौकरी पर लगाया गया है जिसको लेकर विपक्ष ने सरकार को घेर लिया है बीते दिन राहुल गांधी ने मोर्चा संभाल कर अब अपने सोशल अकाउंट पर उत्तराखंड में हुई इन भर्तियों पर निशाना साधते हुए उत्तराखंड सरकार को कटघरे में खड़ा किया है
उत्तराखंड में हुई भर्तियों से राज्य का बेरोजगार युवा अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहा है अभी पेपर लीक का मामला ठंडा होने से पहले नियम विरुद्ध नियुक्तियों से सरकारी सिस्टम पर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है उत्तराखंड विधानसभा में हुई भर्तियों मैं जहां एक और भाई भतीजावाद को बढ़ावा मिला है वहीं दूसरी ओर सरकार के रसूखदार एवं करीबियों ने इसका जमकर फायदा उठाया है विधानसभा में हुई भर्तियों में स्वयं मुख्यमंत्री धामी के ओएसडी और पीआरओ के रिश्तेदार पूर्व कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक के पीआरओ कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज रेखा आर्य और प्रेमचंद अग्रवाल समेत कई मंत्रियों के रिश्तेदार और पी आर ओ को नौकरी मिली है
बीते दिन मीडिया से रूबरू होकर कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने कबूल किया है कि उत्तराखंड विधानसभा में वर्ष 2021 में 72 लोगों की नियुक्ति की गई है उन्होंने यह भी कहा कि बिना विज्ञप्ति के 72 लोगों को नियुक्ति दी गई है उन्होंने यह भी कहा की भर्ती में न सिर्फ उनके बल्कि और मंत्रियों और रसूखदार लोगों के रिश्तेदार की नौकरियां विधानसभा में दी गई हैं पूर्व में विधानसभा अध्यक्ष रह चुके कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने दमदार तरीके से अपनी बात रखते हुए कहा कि इस भर्ती में उनके सगे संबंधी और कई मंत्रियों के सगे संबंधी शामिल हैं क्योंकि वह काबिल थे उन्होंने मीडिया से कहा कि 72 लोगों को नियुक्ति बिना विज्ञप्ति निकाली दी गई क्योंकि विभाग को इसकी जरूरत थी उन्होंने बहुत दमदार तरीके से अपनी बात को रखते हुए कहा कि वीवीआईपी के करीबियों को नौकरी देने में उन्हें कुछ गलत नजर नहीं आया उन्होंने यह भी कहा कि जिन पदों के लिए विज्ञप्ति या निकाली गई थी उन पर अभी हाईकोर्ट के कारण रोग है तथा कोई निर्णय आने के बाद इस पर फैसला होगा
आपको बता दें विगत 30 दिसंबर में विधानसभा में नियुक्तियां की गई तथा 72 कर्मचारियों को पहली तनख्वाह का आदेश 30 मार्च 2022 को हुआ जबकि ही इससे एक दिन पहले यानी 29 मार्च को कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल को वित्त विभाग मिल चुका था वित्त मंत्री ने अब यह मान लिया है कि मंत्री और वीवीआईपी लोगों के पीआरओ विधानसभा में नियुक्त किए गए हैं
इस पूरे मामले को लेकर अब विपक्ष सत्ताधारी सरकार पर हमलावर हो गई है उत्तराखंड कांग्रेस ने इन नियुक्तियों के मामले को लेकर राज्यपाल जनरल गुरमीत सिंह से मिलकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है कांग्रेसी नेताओं के अनुसार विधानसभा में बैक डोर से भाजपा नेताओं ने अपने रिश्तेदारों पत्नियों भाई भांजा भतीजे ड्राइवर की नौकरियां लगवा दी हैं जिस की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए
उत्तराखंड में विधानसभा में हुई भर्तियों की अनियमितता को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जांच करने की बात कही है मुख्यमंत्री धामी ने इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष से बात की उन्होंने विधानसभा में भर्ती अनियमितता मामले की जांच करने का अनुरोध किया है आपको बता दें विधानसभा भर्ती अनियमितता मामले में मुख्यमंत्री आवास से लेकर मंत्रियों और संघ से जुड़े लोगों के करीबियों को विधानसभा में नियुक्ति दी गई थी सीएम धामी ने कहा कि विधानसभा एक संवैधानिक संस्था है इसलिए वह विधानसभा अध्यक्ष से इस बारे में बात करेंगे तथा सरकार इसको लेकर होने वाली जांच में पूरा सहयोग करेगी सीएम धामी के आज के बयान से लगता है कि सरकार केवल भाजपा सरकार के दौरान हुई भर्तियां ही नहीं बल्कि पुराने सरकार के समय हुई भर्तियों की भी जांच कराने के पूरे मूड में है
मजेदार बात यह है कि बिना किसी परीक्षा के बिना किसी आधार पर सतपाल महाराज के पीआरओ राजन रावत की भी विधानसभा में नौकरी लग गई इसके अलावा कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पीआरओ और भाजपा संगठन महामंत्री के करीबी गौरव गर्ग को भी विधानसभा में नौकरी मिली है मामला इतना ही नहीं है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बड़े पदाधिकारियों के करीबी और रिश्तेदार भी विधानसभा में एडजस्ट किए गए हैं उत्तराखंड विधानसभा में निजी सचिव समीक्षा अधिकारी समीक्षा अधिकारी लेखा सहायक समीक्षा अधिकारी शोध एवं संदर्भ व्यवस्थापक लेखाकार सहायक लेखाकार सहायक फोरमैन सूची कार कंप्यूटर ऑपरेटर कंप्यूटर सहायक वाहन चालक स्वागती रक्षक पुरुष और महिला इन सब को मिलाकर विधानसभा में भाई भतीजावाद को बढ़ावा देते हुए भाजपा सरकार में ही मुख्यमंत्री रहे त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी मामले की जांच कराने की मांग की है