Uttarakhand

Uttrakhand : उत्तराखंड अधिवक्ता संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने नैनीताल से हाईकोर्ट शिफ्ट नहीं करने की मांग

नैनीताल : उत्तराखंड अधिवक्ता संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने नैनीताल से हाईकोर्ट शिफ्ट नहीं करने की मांग की है। मोर्चा का साफ कहना है कि नैनीताल से हाईकोर्ट शिफ्ट होने से बड़े स्तर पर पलायन बढ़ेगा, जो राज्य की मूल अवधारणा के खिलाफ है मोर्चा के संयोजक दुर्गा सिंह मेहता व अन्य की ओर से मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि उत्तराखंड अपनी विशेष सांस्कृतिक, राजनैतिक, भौगोलिक विरासत व जन आंदोलनों व जनता की शहादत से बना राज्य है। राज्य का गठन पहाड़ से पलायन रोकने व विशेष रूप से पहाड़ के विकास के लिए किया गया, लेकिन अलग राज्य बनने के बाद पहाड़ के लगभग 1000 गांव निर्जन हो चुके है।उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्र में औद्योगिकीकरण व शहरीकरण से 20 प्रतिशत खेती की जमीन समाप्त हो चुकी है, औद्योगिक विकास भी केवल उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रो में ही हुआ, पहाड़ी जिलों से लगभग 32 लाख लोग पलायन कर चुके हैं। पहाड़ में ना उद्योग लग सके और न ही वहां राज्य स्तरीय व केंद्रीय संस्थान खोले गये, उसके उलट कई राजकीय संस्थान पहाड़ से मैदान में शिफ्ट कर दिये गये और पहाड़ में भी जंगली जानवरों के कारण खेती की जमीनें बंजर हो चुकी है।मोर्चा का कहना है कि नैनीताल उत्तराखंड की न्यायिक राजधानी है, 1815 मे अंग्रेजों ने कुमाऊं व गढ़वाल को जोड़कर कुमाऊं कमिश्नरी की स्थापना की और उत्तराखंड के सभी न्यायिक व प्रशासनिक कार्य नैनीताल से ही किये जाने लगा था । 1862 से नैनीताल को तत्कालीन संयुक्त प्रांत की राजधानी भी बना दिया गया। नैनीताल का इतिहास पर्यटन से अधिक न्यायिक व प्रशासनिक है इसलिए उत्तराखंड की स्थापना के समय ही नैनीताल मे उत्तराखंड की स्थाई हाई कोर्ट की स्थापना की गई।भवाली में नेशनल ला कालेज की स्थापना का भी प्रस्ताव था लेकिन उसका रुख भी देहरादून की ओर मोड़ दिया गया. अब नैनीताल हाईकोर्ट में रेगुलर वकालत करने वाले अधिवक्ताओं की संख्या लगभग 800 है, जिसमें उत्तराखंड के सभी जिलों से आने वाले 500 अधिवक्ता स्थाई रूप से नैनीताल में रह रहे हैं।नैनीताल मे उत्तराखंड का उच्च न्यायालय होने से उत्तर प्रदेश से आये अधिवक्तागण व मैदानी जिला देहरादून, हरिद्वार व उधम सिंह नगर में रहने वाले अधिवक्ता भी स्थायी रूप से नैनीताल, भवाली, भीमताल, ज्योतीकोट, खुर्पाताल व नजदीकी इलाकों में स्थायी रूप से रहने लगे हैं। यह रिवर्स पलायन का सबसे बड़ा उदाहरण है।

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