उत्तराखण्ड :काठगोदाम में है अंग्रेजों के जमाने की रेलवे लाइन, अब इसे बचाने की चुनौती

हल्द्वानी : कुमाऊं की सबसे पुरानी रेल लाइन एक ओर गौला नदी के मुहाने पर है तो दूसरी ओर अतिक्रमण से घिरी है। 10 अक्टूबर से इन लाइन पर ट्रेनों का संचालन बंद है। सुरक्षा दीवार बनाकर ट्रेनों का संचालन शुरू हो सकता है मगर अभी तक रेलवे की ओर से कोई सकारात्मक पहल होती दिख नहीं रही है।काठगोदाम रेलवे स्टेशन में पहली बार 24 अप्रैल 1884 को ट्रेन आई थी। तब अंग्रेजी हुकूमत से परेशान पहाड़वासी इसे कोई बड़ी साजिश समझ बैठे थे। बाद में पता चला कि उन्हें पहाड़ व महानगरों तक पहुंचने के लिए सीधी सेवा मिल गई है। लखनऊ से काठगोदाम पहली ट्रेन इसी लाइन पर पहुंची थी, जो अब स्टेशन पर रेलवे लाइन संख्या तीन है।यह लाइन 10 अक्टूबर को गौला नदी की बाढ़ की चपेट में आ गई। लाइन की ओर भू-कूटाव होने पर एहतियातन ट्रेनों की आवाजाही को रोकना पड़ा। एक महीना बीत जाने के बाद भी इस लाइन पर ट्रेनों की संचालन शुरू नहीं हो सका है।रेलवे अधिकारियों के अनुसार नदी की ओर जब तक सुरक्षा दीवार नहीं बन जाती, तब तक ट्रेनों का संचालन खतरे से खाली नहीं होगा। इसके लिए प्रस्ताव बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा। सुरक्षा के ठोस इंतजाम होने पर ही ट्रेनों की आवाजाही शुरू हो सकेगी। वहीं रेल लाइन की दूसरी ओर अतिक्रमण होने से शिफ्ट करने की स्थिति नहीं है।रेलवे की लाइन संख्या तीन पर ट्रेनों का संचालन अभी बंद है। लाइन की सुरक्षा के लिए कई काम होने हैं। जल्द ट्रेनों की आवाजाही शुरू करने का प्रयास है।