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जलविद्युत परियोजनाओं की पर्यावरणीय मंजूरी रद करने की मांग करती याचिका खारिज

 नैनीताल। हाईकोर्ट ने चमोली जिले में ऋषि गंगा और तपोवन-विष्णुगाड़ जलविद्युत परियोजनाओं के लिए वन और पर्यावरण मंजूरी रद्द करने और चमोली जिले में चिपको आंदोलन की नेतृत्वकर्ता गौरा देवी के रैणी गांव के पुनर्वास की मांग करने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया। साथ ही याचिकाकर्ता पर दस हजार रुपये जुर्माना लगाते हुए यह रकम अधिवक्ता कल्याण कोष में जमा करने का आदेश पारित किया है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस चौहान व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में रैणी गांव के समाजसेवी संग्राम सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान एनटीपीसी के अधिवक्ता डॉ. कार्तिकेय हरि गुप्ता ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता वास्तविक और ईमानदार इरादों से आश्वस्त नहीं था। उन्होंने कहा कि बहुत महत्व की ऐसी परियोजनाओं को केवल शिकायतों पर नहीं रोका जा सकता है।
याचिकाकर्ता सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अपनी ईमानदारी दिखाने में विफल रहा है। जिसके बाद न्यायालय ने याचिकाकर्ता पर 10,000 रुपये अर्थदंड लगाते हुए याचिका को खारिज कर दिया है। डॉ गुप्ता ने कहा कि तपोवन विष्णुगाड़ जलविद्युत परियोजना उत्तराखंड राज्य और एनटीपीसी के लिए अत्यधिक महत्व की है। प्रोजेक्ट हमेशा पर्यावरणीय मंजूरी के साथ काम करता है। पहाड़ियों के सतत विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

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