Uttarakhand

उत्तराखंड में बुरे दौर से गुजर रहे इंटरनेशनल खिलाड़ी

वीरेंद्र रावत की जुबानी,देहरादून के गाँधी पार्क मे नमकीन बिस्कुट बेचने को मजबूर है खिलाड़ी

 

*उत्तराखंड मे खेल नीति आज लागु होती तो नेशनल और इंटरनेशनल खिलाड़ियों को रोड पर नमकीन, चिप्स और बिस्कुट ना बेचने पड़ते सुने विरेन्द्र सिंह रावत की जबानी*

देहरादून,आज 20 सालो मे ये हालात पैदा कर दिए उत्तराखंड सरकारों ने की नेशनल और इंटरनेशनल और पदक विजेता खिलाडी, कोच, रेफरी सड़को पर चिप्स, बिस्कुट और नमकीन बेच रहा है या नशे मे बर्बाद है, या आत्मा हत्या कर रहा है, या पलायन कर रहा है या बेरोजगारी की दंश झेल रहा है और तो और छोड़ो राज्य खेल फुटबाल का भी बुरा हाल है बाकी खेलो का तो क्या कहना ये कहना है
उत्तराखंड के प्रसिद्ध पूर्व फुटबाल खिलाडी, नेशनल कोच क्लास वन रेफरी अनगिनत इंटरनेशनल,नेशनल और स्टेट अवार्ड से सम्मानित देहरादून फुटबाल अकादमी के संस्थापक अध्यक्ष हेड कोच विरेन्द्र सिंह रावत का वैसे तो 20 साल से जो भी सरकार आयी किसी ने भी सुध नहीं ली की जो मुख्य खेल है उनको महत्व दिया जाय हमने कई प्रस्ताव और सुझाव दिए खेल मंत्री और मुख्यमंत्री को, खेल सचिव को की खिलाडी कोच और रेफरी को अच्छे प्रदर्शन पर 4 प्रतिशत स्पोर्ट्स कोटा हो, सरकारी नौकरी मिले, नेशनल और इंटरनेशनल खिलाडी कोच और रेफरी को सम्मानित किया जाए, ग्रासरूट खिलाडी 6 साल से 12 साल के बालक बालिका को सरकारी खेल विभाग मे बेहतरीन कोचिंग दी जाए शिक्षा, कोचिंग फ्री दे और जो अच्छा प्रदर्शन करता है उनको भविष्य मे नौकरी दे जैसे की आज से 20 साल पहले उत्तर प्रदेश मे ज़ब उत्तराखंड था तब स्पोर्ट्स कोटा 4 प्रतिशत के तहत नौकरी मिलती थी आज सब बंद है
हमने अक्टूबर 2020 माह मे सरकार को खेल नीति के लिए 32 सुझाव दिए थे सरकार ने स्वीकार भी किए विधानसभा मे सर्वसम्मति से पास भी हुवा जनवरी 2021धरातल पर लागु होना था देखिए आज 6 माह हो गए कुछ नहीं हुवा सरकार को 2022 की चुनाव की चिंता हैं सरकार दुबारा आएगी तभी कुछ लालच दिया जाएगा खिलाड़ियों को फिर वही लूट खसोट होगी जो 20 सालो से होता आ रहा है आज देखिए हमे जब पता चला की एक अंतराष्ट्रीय पैरा शूटर दिलराज कौर जिसने 28 गोल्ड, 5 सिल्वर और 6 ब्रोन्स मैडल जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया और कांग्रेस की सरकार मे उनको सरकारी नौकरी देने का वादा किया जिओ जारी किया लेकिन नहीं दी गुमराह किया फिर बीजेपी की सरकार आयी वो भी गुमराह करती रही और आज तक नौकरी नहीं मिली पिताजी भाई इस दुनिया मे नहीं है और माँ के साथ किराये के मकान मे रहने को मजबूर है आय का कोई साधन नहीं है इसलिए सरकारों की बेवफाई से मजबूर होकर देहरादून के गाँधी पार्क मे नमकीन बिस्कुट बेचने को मजबूर है आज उनसे मुलाक़ात हुई उनके आंसू देखे नहीं गए और बोला हम आपके साथ है
ये हाल कर दिया सरकारों ने उत्तराखंड मे बेरोजगारी का अम्बार लगा दिया सरकार को तो लूटना है आम जनता को कैसे भी
ऐसा कब तक चलेगा इसलिए विरेन्द्र सिंह रावत ने मजबूर होकर राजनीति का दामन थामा उत्तराखंड क्रांति दल मे केंद्रीय अध्यक्ष खेल प्रकोष्ठ का पद लेकर कियुकी उनके साथ भी इन 20 सालो मे बहूत शोषण किया इन दोनों सरकारों ने बीजेपी कांग्रेस ने बारी बारी से लुटा इस छोटे से प्रदेश को
रावत ने खेलो के विकास के लिए नोकरी छोड़ी, कर्ज किया, शोषण सहा, जमीन बेचीं,जेल गया और कई बार घायल हुवा
लेकिन आज भी उत्तराखंड के खिलाड़ियों, कोचो और रेफरी के विकास के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष कर रहा है और करेगा अगर भविष्य मे खेल मंत्री का मौका मिला तो निश्वार्थ भाव से खिलाड़ियों के लिए वो सुविधा मिलेगी जिसको वो जीवन भर याद करेंगे हम रहे या ना रहे हमारी बेहतरीन खेल नीति रहेगी

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