देहरादून : अवैध नशा मुक्ति केंद्र पर हो सख्त कार्यवाही-शिवा वर्मा
आर टी आई के तहत खुलासा नशा मुक्ति केन्द्र में एक कमरे में रह रहे 35 पुरुष।

देहरादून। जिले में नशा मुक्ति केंद्रों की हालत किसी से छिपी नहीं है पूर्व में कुछ नशा मुक्ति केंद्रों में दुष्कर्म मारपीट वाह प्रताड़ना की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं कुछ घटनाएं जो कुछ महीनों के अंतराल में हुई हैं वह निम्न प्रकार है –
क) 24 अक्टूबर को रिस्पना पुल के निकट लाइफ केयर फाउंडेशन रिहैब सेंटर में भर्ती युवक इशांत शर्मा निवासी गुजराड़ा की तबीयत खराब होने के बाद मौत हो गई ।
ख) 5 अगस्त को क्लिमेंटाउन क्षेत्र में प्रकृति विहार स्थित नशा मुक्ति केंद्र के संचालक पर एक युवती के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा ।
ग) 23 अगस्त को वसंत विहार स्थित जीवन परिवर्तन नशा मुक्ति केंद्र से 12 युवक फरार हो गए ।
घ) राजपुर थाना क्षेत्र के बेस्ट गांव में जागृति फाउंडेशन नशा मुक्ति केंद्र में एक मरीज की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई उसका शव बाथरूम के रोशनदान से फंदे पर लटका मिला।
ड) वसंत विहार क्षेत्र में संचालित एक नशा मुक्ति केंद्र से 8 से 10लोग फरार हो गये।
जिले में नशामुक्ति केन्द्रों पर आज तक किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नही हुई है ,जिस वजह से नशा मुक्ति केन्द्र बेरोकटोक संचालित हो रहे है ।अधिवक्ता शिवा वर्मा की और से सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में यह खुलासा हुआ है । हाल ही में शिवा वर्मा द्वारा जिला प्रशासन से जानकारी मांगी थी कि की किस नियम के तहत नाशा मुक्ति केन्द्रों को खोलने की स्वीकृति दी गई है एवं जिला अधिकारी द्वारा जारी बयान के परिपेक्ष में गठित कमेटी में कितने सदस्य नियुक्त किये गए हैं और उनके द्वारा नशामुक्ति केन्द्रों पर बनाई गई कमेटी की रिपोर्ट कँहा है। जिला प्रशासन ने जवाब देने के बजाय उसको समाज कल्याण विभाग को भेज दी जिस पर समाज कल्याण द्वारा सूचना कार्यालय में धारित नही होना बता दिया ।
दूसरी सूचना स्वास्थ्य विभाग से मांगी गई जिस पर एक बड़ी बात निकल कर सामने आई कि पूरे जिले में नशा मुक्ति केंद्रों की सूची मात्र संख्या 40 की है जिनका संचालन बिना किसी मानक के हो रहा है । आम जनमानस से नशा मुक्ति केंद्रों की आड़ में लूट खसोट का व्यापार चल रहा है एक बहुत बड़ी बात यह निकल कर आई है कि 61 पुरुष मात्र 2 कमरे में रखे हुए हैं ,वही 94 पुरुष 7 कमरों में रखे गए हैं ,20 पुरुष एक कमरे में रखे गए हैं ,35 पुरुष एक कमरे में रखे गए हैं ,90 पुरुष 7 कमरों में रखे गए हैं कई केंद्र ऐसे भी हैं जो बिना शिकायत रजिस्टर, बिना सीसीटीवी कैमरे, बिना विजिटिंग रजिस्टर ,बिना सक्षम अधिकारी की टिप्पणी व अन्य विवरणों से दूर है । अधिवक्ता शिवा वर्मा द्वारा प्रेस को संबोधित करते हुए यह भी अवगत कराया है कि जिस s.o.p. को माननीय जिलाधिकारी द्वारा दिनांक 13 नवंबर 2021 को जारी किया गया था वह ठंडे बस्ते में डाल दी गई है यह कहते हुए की माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल द्वारा s.o.p. में शिथिलता देने को कहा था ।
अधिवक्ता वर्मा ने उस हाईकोर्ट के आदेश दिनांक 13 दिसंबर 2021 रिट पिटिशन m/s 2606 वर्ष 2021 एवं अन्य जितनी भी रिट पिटिशन उपरोक्त संबंधित थी उसके आदेश को विस्तृता से बताया कि मननीय उच्च न्यायालय ने कहा कि
”रिट याचिका का निपटारा जिला मजिस्ट्रेट देहरादून को कानून के अनुसार याचिकाकर्ताओं के प्रतिनिधित्व पर निर्णय लेने के निर्देश के साथ किया गया है” लेकिन विभाग की लापरवाही के चलते वह s o p आज तक अस्तित्व में नहीं आई जो कि बहुत ही निराशाजनक और आशचर्य जनक बात है लोगों की जिंदगीयों के साथ नशा मुक्ति केंद्रों की आड़ में खिलवाड़ हो रहा है, लोग प्रताड़ित हो रहे हैं, लोग शारीरिक दुष्कर्म के शिकार हो रहे हैं, व आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं । यह अपने आप में एक बहुत बड़ा प्रशन चिन्ह पैदा करता है कि विभाग कुम्भकरण की नींद सोए हुए हैं । मानक में शिथिलता देने का अर्थ यह नहीं है कि आप किसी बनी हुई योजना को ठंडे बस्ते में डाल दें। मानक कानूनन अनुसार होने चाहिए यह बात माननीय न्यायालय भी कहता है और नशा मुक्ति केंद्रों का पंजीकरण क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट एवं मेंटल हेल्थ केयर एक्ट 2017 के तहत किया जाना अनिवार्य है जिससे कि पारदर्शिता रहे । जो व्यक्ति शुल्क देकर नशा मुक्ति केंद्र में इलाज चाहता है तो उसको सही इलाज मिल सके और व सुख सुविधा का लाभ ले सके ।