पांच साल तक के बच्चों को जरूरी नहीं मास्क
6-11 वर्ष के बच्चे को उसकी क्षमता के हिसाब से अभिभावक मास्क पहनाएं।

पांच साल तक के बच्चों को जरूरी नहीं मास्क
देहरादून। कोरोना की तीसरी लहर में 17 साल से कम उम्र के बच्चों को लेकर चिंता जताई जा रही है। स्वास्थ्य रक्षा के लिए कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच हर व्यक्ति को मास्क लगाने की सलाह दी जा रही है लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की नई गाइडलाइन में पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए मास्क जरूरी नहीं बताया गया है। दरअसल बच्चों को बेहतर प्रतिरोधक क्षमता का तोहफा कुदरत से मिला है। 12 साल की उम्र तक बच्चों के गले में पाई जाने वाली थाइमस ग्रंथि (इम्यूनिटी का पावर हाउस) संक्रमण से उनकी रक्षा करेगी। इसके साथ ही संक्रमण की चपेट में आने पर स्टेरॉयड और रेमडेसिविर इंजेक्शन का उपयोग सिर्फ आपात स्थिति में ही किया जा सकेगा। थाइमस ग्रंथि बच्चों का ऊर्जा केंद्र होती है। इसकी वजह से बच्चों को बीमारियों से लडऩे की क्षमता मिलती है। हालांकि गंभीर या अति गंभीर बीमार बच्चों में तो दिक्कत रहती ही है।
गाइडलाइन में बताया गया है। 12-17 आयु वर्ग के बच्चों का ऑक्सीजन सेचुरेशन (एसपीओटू) लेने को छह मिनट वाक टेस्ट कराएं। अंगुली में पल्स आक्सीमीटर लगाकर छह मिनट तक चलाएं, ताकि संक्रमण और शारीरिक स्थिति का पता चल सके। टेस्ट माता-पिता की देखरेख में हो। एसपीओटू 94 से कम होने पर सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। तत्काल अस्पताल में भर्ती कर आक्सीजन थेरेपी दिलाएं। अगर बच्चा अस्थमा पीडि़त है तो वाक टेस्ट न कराएं।
गंभीर स्थिति में विशेषज्ञों की टीम बच्चों में स्टेरॉयड देने का निर्णय लेगी। उन्हेंं यह देखना होगा कि कब, कितनी मात्रा और कितने दिन स्टेरॉयड देनी है। ध्यान रहे, बच्चों के स्वजन स्टेरॉयड अपने मन से कतई न दें।
बच्चों के इलाज में डाक्टर संजीदा रहें। फेफड़े में संक्रमण की स्थिति जानने को बहुत जरूरी होने पर सीटी स्कैन कराएं। जो दवाएं चलाएं, उनसे बीमारी की गंभीरता और शरीर को कितना नुकसान पहुंच रहा है, इसकी भी निगरानी करते रहें।
मास्क के लिए जरूरी
– 6-11 वर्ष के बच्चे को उसकी क्षमता के हिसाब से अभिभावक मास्क पहनाएं।
– 12 साल से अधिक उम्र के बच्चे वयस्कों की तरह की मास्क पहनें।
– साबुन और पानी से अच्छी तरह हाथ धुलाने के बाद मास्क पहनाएं।
– अल्कोहल बेस्ड सैनिटाइजर से भी हाथ साफ करके मास्क पहनाएं।
इसका करें पालन
– बिना लक्षण के संक्रमित बच्चों को कोई दवा न दें।
– बच्चों को स्वच्छता, हाथ साफ रखने की महत्ता बताएं।
– संक्रमण से बचाव के लिए एक-दूसरे से दूरी रखना बताएं।
– भोजन में पौष्टिक आहार देकर बच्चों की इम्यूनिटी बढ़ाएं।